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क्या शिक्षा की बलि देकर लोकतंत्र मजबूत होगा?

 क्या शिक्षा की बलि देकर लोकतंत्र मजबूत होगा? — एक BLO शिक्षक की व्यथा ​आज का दौर डिजिटल इंडिया और दक्षता (Efficiency) का है, लेकिन हमारे जमीनी प्रशासनिक कार्यों में आज भी वही दशकों पुरानी परिपाटी चल रही है। विशेषकर शिक्षा विभाग के कंधों पर जब 'बीएलओ' ( Booth Level Officer ) का भारी-भरकम झोला टांग दिया जाता है, तो नुकसान सिर्फ शिक्षक का नहीं, बल्कि उन मासूम बच्चों का होता है जो कक्षा में अपने गुरुजी की राह तकते रह जाते हैं। ​1. दो नावों की सवारी: विभाग बनाम ड्यूटी ​एक शिक्षक की मूल नियुक्ति शिक्षा दान के लिए हुई है। लेकिन वर्तमान में, शिक्षक स्कूल जाने के बजाय गांव-गांव की गलियों में नोटिस बांटने, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के लिए मजबूर है। जब एक बीएलओ शिक्षक स्कूल पहुँचता भी है, तो उसका मन रजिस्टर के आंकड़ों और फील्ड की 'डिटेल्स' में उलझा रहता है। क्या ऐसी मानसिक स्थिति में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संभव है? ​2. स्कूलों का गिरता शैक्षिक स्तर और सुरक्षा ​जैसा कि देखने में आया है कई जगह— 200 से 250 बच्चों पर मात्र 3 या चार स्टाफ, और उनमें से भी एक बीएलओ ड्यूटी पर! ऐस...

शिवतांडव एवं भौतिक विज्ञान

  शिव का तांडव और भौतिकी: नटराज रूप में छिपे भौतिक सिद्धांत भारतीय संस्कृति में भगवान शिव का नटराज रूप न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भौतिकी के कई मूलभूत सिद्धांतों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। यह अद्भुत संयोग है कि जो सत्य हमारे ऋषियों ने प्रतीकात्मक रूप में व्यक्त किया, वही आधुनिक विज्ञान के सिद्धांतों से भी मेल खाता है। शिव का तांडव केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की संपूर्ण प्रक्रिया का प्रतीक है—सृजन, संरक्षण और विनाश का सतत चक्र। यदि हम भौतिकी के परिप्रेक्ष्य से इसे देखें, तो इसमें गति के नियमों से लेकर ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत तक सब कुछ समाहित है। नटराज और न्यूटन के गति के नियम आइजैक न्यूटन के गति के तीनों नियम शिव के तांडव में स्पष्ट रूप से झलकते हैं। प्रथम नियम (जड़त्व का नियम) —नटराज की मुद्रा में शिव संतुलन बनाए रखते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि जब तक कोई बाहरी बल न लगाया जाए, तब तक कोई वस्तु अपनी गति या विराम की अवस्था को बनाए रखती है। यह ब्रह्मांडीय संतुलन का प्रतीक है, जहाँ हर चीज अपने स्वाभाविक नियमों के अनुसार चलती है। द्वितीय न...

शिवलिंग एवम् ऊर्जा विज्ञान

शिवलिंग और ऊर्जा विज्ञान: ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक शिवलिंग केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि यह ब्रह्मांड की मूलभूत ऊर्जा और वैज्ञानिक सिद्धांतों का प्रतिनिधित्व करता है। यह एक ऊर्जा केंद्र (Energy Vortex) है, जो ब्रह्मांड में व्याप्त शक्ति और सृजनात्मक प्रवाह का प्रतीक है। इसे अगर आधुनिक विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए, तो यह कई महत्वपूर्ण सिद्धांतों से मेल खाता है, जिनमें क्वांटम फिजिक्स, ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy), स्पिरिचुअल जियोमेट्री (Sacred Geometry), और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड शामिल हैं। --- 1. शिवलिंग और ब्रह्मांड की संरचना 1.1 स्थिर आधार (शक्ति) और गतिशील ऊर्जा (शिव) शिवलिंग का आकार और उसकी संरचना यिन-यांग (शिव-शक्ति ) के संतुलन को दर्शाती है। शक्ति – यह स्त्री शक्ति (शक्ति तत्व) का प्रतीक है, जो सृजन, पोषण और स्थिरता का प्रतिनिधित्व करता है। शिवलिंग का आधार (योनिपीठ) इस शक्ति को दर्शाता है। शिव – यह पुरुष शक्ति (शिव तत्व) का प्रतीक है, जो गतिशीलता, परिवर्तन और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। शिवलिंग का ऊपरी अंडाकार भाग इस शक्ति का द्योतक है। यह संयोजन हमें क्वांटम य...